कल तक था उसे प्यार, आज नहीं है
उसकी आँखों में कितना प्यार कितनी सच्चाई दिखती / मेरी कितनी चिंता थी, कितना ख्याल रखती
उसकी आँखों में कितना प्यार कितनी सच्चाई दिखती / मेरी कितनी चिंता थी, कितना ख्याल रखती
थकी हारी दीवारों के उपर एक गीली गीली छत है / हर शाम वही बैठ कर आँखे भिजाने की लत है
एक इशारा तो किया होता ,कब मैं तुमसे दूर थी / तुमने हाथ तभी माँगा जब हो चुकी मजबूर थी
हर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में, / वह सवेरा आता भी है तो बस कुछ वादे करने के लिए ,
उसके कदमों पे गिर जाता मैं इतना भी मज़बूर न था / चाहता था बहुत उसे पर ये मेरे दिल को मंज़ूर ना था
कभी हमने ना सोचा था कि ऐसा भी होगा, / कि जिन्दगी के ऐसे मोड़ पर आ खड़े होंगे,