दिल के टुकड़े
इन आँखों के सैलाब से दो बूंद पानी मांग लेते
तुम्हे हक़ था मेरी जवानी मांग लेते
जाते जाते इतना तो रहम किया होता
कि मुझसे अपनी वो प्यार की निशानी मांग लेते
Written in 2009.
इन आँखों के सैलाब से दो बूंद पानी मांग लेते
तुम्हे हक़ था मेरी जवानी मांग लेते
जाते जाते इतना तो रहम किया होता
कि मुझसे अपनी वो प्यार की निशानी मांग लेते
Written in 2009.
प्यार करता हूँ तुम्हे मेरी कमज़ोरी है, / पर क्या करूँ जीने के लिए ज़रुरी है,
थकी हारी दीवारों के उपर एक गीली गीली छत है / हर शाम वही बैठ कर आँखे भिजाने की लत है
And I m like a obscurity to this commitment / Playing with myself a foul game of legacy about an intimacy
1. गुजारिशें जानीं कितनी की थी, / पर ना हटाती थी झुल्फ़ें ना दिखाती थी चेहरा,
लहराती हो जब आँचल तो पेड़ झूमते हैं / छुप छुप के देखते हम पेड़ो को चूमते हैं
उसकी आँखों में कितना प्यार कितनी सच्चाई दिखती / मेरी कितनी चिंता थी, कितना ख्याल रखती