हम वो गुलाब है

दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं ।
दुनिया के प्रेम प्रसंगो में हम गुलाबों को टूटना हीं पड़ता है,
और हमे देने वाले हर प्रेमी को झुकना हीं पड़ता है,
कभी हमे फरमाइश कभी नुमाइश बना दिया,
जी चाहा ज़ुल्फों में लगाया,जी चाहा सेज़ पे सज़ा दिया,
मेरे तन को छेड़ कर , दीवाने कैसे मचल जाते हैं,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं ।
बात अभी इतनी होती तो क्या बात थी,
पर अभी और भी काली होने वाली रात थी,
मेरे अरमानों को कुचल कर इत्र बना दिया,
और दिखावटी शिशियों में भर कर सजा दिया,
हम मर कर भी साँसों में महक छोड़ जाते है,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं ।

Written in 2007.

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