नव योवना
दिल दुर हुवा , तीर पार लगे, / मन मज़बूर हूआ वह यार लगे,
दिल दुर हुवा , तीर पार लगे, / मन मज़बूर हूआ वह यार लगे,
कब तक दिन के अधेंरे मेम मिलते रहेंगे आह भरते रहेंगे, / एक दुसरे का नाम लेते रहेंगे,
पान के छीटे जो पड़े बुरा ना मानिए ज़माना रंगीन है, / इससे तो आप लग रहें,
बड़ी खुबसुरत लगती हो , लगती रहो, / दिल जलाने के लिए दीवानों का यूँ हीं सजती सँवरती रहो,
रुक गई थी धरती रुक गया आसमान था, / रुके हुए थे हुम दोनो और रुका सारा जहान था,
मेरा दिल और मेरी जान तुझ पर मिटने को बेताब है , / बढने लगी बेचैनी मेरी बढने लगी आँखो की प्यास है ,
पल भर तो पास बैठो मेरे, तुम्हें जी भर के देख लेने दो, / तेरी आँखो का नूर हीं मेरे जिने का सहारा है,
मॆरॆ सामनॆ बैठी हॊ तुम नही हॊ रहा है यकिन / बाँहॊ मॆ भर लॊ मुझॆ पागल ना हॊ जाऊ कही