फेर लड़कियों के नाम की मनका
जलता रहा है दिल कब से, अब सिर्फ राख बाकी है / मिल ना सका प्यार जो उसकी अभी भी तलाश बाकी है
जलता रहा है दिल कब से, अब सिर्फ राख बाकी है / मिल ना सका प्यार जो उसकी अभी भी तलाश बाकी है
चाहे मेरी चाहत को मोहब्बत का नाम ना दे, / पर अपने रुप तूफ़ान में बिखर जाने से ना रोक मुझे,
आओ इस गुमसुम सफ़र में हँसी का कोई पल ढूंढ लें / इस अंधेरे आज में सुनहरा कल ढूंढ लें,
हर एक पल बेखबर है इश्क की परछाइयों से, / गैर की गलियां झूम रही मेरे हीं शहनाईयों से,
फिर मिला देना हमें ऐ आसमान, / अगर मिल जाए तुझको वक्त कहीं,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं । / दुनिया के प्रेम प्रसंगो में हम गुलाबों को टूटना हीं पड़ता है,
डुबते को तिनके का सहारा होता, / दुनिया की इस भीड़ में कोइ तो हमारा होता,
प्यार करता हूँ तुम्हे मेरी कमज़ोरी है, / पर क्या करूँ जीने के लिए ज़रुरी है,
ये जो पर्दा है बेदर्दी जान ले लेगा, / मैं प्यार करता हूँ उससे यह बात मेरे सिवा कोई जानता नहीं,
रात बहुत हो चुकी है, / पर आँखो में नींद नहीं है,