नव योवना
दिल दुर हुवा , तीर पार लगे, / मन मज़बूर हूआ वह यार लगे,
Hindi poems by Nishikant Tiwari.
दिल दुर हुवा , तीर पार लगे, / मन मज़बूर हूआ वह यार लगे,
कब तक दिन के अधेंरे मेम मिलते रहेंगे आह भरते रहेंगे, / एक दुसरे का नाम लेते रहेंगे,
देख के दिल्वा धक-धक करेला / मरी ई बुढ़ुवा आज
बड़ी खुबसुरत लगती हो , लगती रहो, / दिल जलाने के लिए दीवानों का यूँ हीं सजती सँवरती रहो,
कब तक अपने आप को जलाते रहेंगे, / खुद का तमशा बनाकर ताली बजाते रहेंगे,
रुक गई थी धरती रुक गया आसमान था, / रुके हुए थे हुम दोनो और रुका सारा जहान था,
मेरा दिल और मेरी जान तुझ पर मिटने को बेताब है , / बढने लगी बेचैनी मेरी बढने लगी आँखो की प्यास है ,
कभी हमने ना सोचा था कि ऐसा भी होगा, / कि जिन्दगी के ऐसे मोड़ पर आ खड़े होंगे,
पल भर तो पास बैठो मेरे, तुम्हें जी भर के देख लेने दो, / तेरी आँखो का नूर हीं मेरे जिने का सहारा है,