एक नये सुबह का इन्तज़ार
हर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में, / वह सवेरा आता भी है तो बस कुछ वादे करने के लिए ,
Hindi poems by Nishikant Tiwari.
हर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में, / वह सवेरा आता भी है तो बस कुछ वादे करने के लिए ,
फिर मिला देना हमें ऐ आसमान, / अगर मिल जाए तुझको वक्त कहीं,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं । / दुनिया के प्रेम प्रसंगो में हम गुलाबों को टूटना हीं पड़ता है,
पानी के कुछ बुलबुलों में दुनिया जहान को डूबते देखा है, / सभ्यता की नई गलियों में इन्सान को मिटते देखा है,
I prayed, I wished, the seat next to me / May be occupied by a girl, a beautiful one
तेरी बेवफाई से बिखर गया मैं हज़ार टुकड़ो में , / जिस टुकड़े में मेरा दिल था वो टुकड़ा आज भी ढूंढता हूँ,
पुराने रिश्तों को तोड़ कर नए बनाए नही जाते / और झूट की बुनियाद के महल होते है रेत के
आए थे जहाँ से जाना वही है , सफर है लम्बा सुहाना नहीं है / दो बातें हमसे भी कीजिए , यहाँ कोई बेगाना नहीं है ।
1.एक दिन रेस्टुरेंट में मुझे एक दोस्त मिल गया / देखकर मुझे उसका चेहरा एक्दम से खिल गया
उठते है कदम तेज मेरे मगर पर, / मंजिलों की अपनी दुरियाँ हैं ,