आओ सखी साथ एक शाम गुजारे
An invitation to slow down and spend one unhurried evening together, watching the sun go down.
Hindi poems by Nishikant Tiwari.
An invitation to slow down and spend one unhurried evening together, watching the sun go down.
उसकी आँखों में कितना प्यार कितनी सच्चाई दिखती / मेरी कितनी चिंता थी, कितना ख्याल रखती
लहराती हो जब आँचल तो पेड़ झूमते हैं / छुप छुप के देखते हम पेड़ो को चूमते हैं
On the one chance that came, and slipped away.
छू कर तेरे गालों को ,क्या मिला मुझे इनकी कोमलता छीन कर / बिखरा के कजरा आंसुओ से अब इन्हें और न मलिन कर
जब याद करके तेरा उदास मुखड़ा हृदय फटने लगता है / और अपनी रिश्ते की अनिश्चिताओं में मन भटकने लगता है
An ache that does not fade, however hard I try.
अपनी ठेला गाडी लाकर लगा देता हूँ | / लोग आते है और मेरे बनाए स्वादिस्ट चाट का चटकारा लगाकर चले जाते
थकी हारी दीवारों के उपर एक गीली गीली छत है / हर शाम वही बैठ कर आँखे भिजाने की लत है
इन आँखों के सैलाब से दो बूंद पानी मांग लेते / तुम्हे हक़ था मेरी जवानी मांग लेते