एक ठोकर लगाने आ जाते
एक इशारा तो किया होता ,कब मैं तुमसे दूर थी / तुमने हाथ तभी माँगा जब हो चुकी मजबूर थी
Hindi poems by Nishikant Tiwari.
एक इशारा तो किया होता ,कब मैं तुमसे दूर थी / तुमने हाथ तभी माँगा जब हो चुकी मजबूर थी
And I m like a obscurity to this commitment / Playing with myself a foul game of legacy about an intimacy
मर के जीने की कोशिश कर रहा जो जी के न जी सका कभी / फ़िर भी स्वार्थ की नई कीमत खोजता एक खोज मेरे भीतर
न्याय का बना बैठा रक्षक वही है जो / ख़ुद सर उठाने के काबिल नही है
ख्यालों का कुछ ऐसा समां बंध गया है , / कि दर्द हीं दिल का दवा बन गया है ,
1. गुजारिशें जानीं कितनी की थी, / पर ना हटाती थी झुल्फ़ें ना दिखाती थी चेहरा,
चाहे मेरी चाहत को मोहब्बत का नाम ना दे, / पर अपने रुप तूफ़ान में बिखर जाने से ना रोक मुझे,
आओ इस गुमसुम सफ़र में हँसी का कोई पल ढूंढ लें / इस अंधेरे आज में सुनहरा कल ढूंढ लें,
कुछ अधुरे सपने ,मेरी मुश्किलें ,मेरी कठनाई थी, / मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी ।
हर एक पल बेखबर है इश्क की परछाइयों से, / गैर की गलियां झूम रही मेरे हीं शहनाईयों से,